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Thursday, March 28, 2013

किस रंग में बेरंग हो?




न सोच न समझ,
न सच न झलक,
न मंज़िल न कोई रास्ता,
क्यूँ बेरंग से बढ़ रहे,
किस रंग में बेरंग हो तुम?

किस रंग में?

न माता न पिता,
बस हैं कुछ दोस्त साथी,
जो आज हैं, पर देखा न उनके संग कल,
वो जाने हैं आज क्या हुआ,
पर न भनक उन्हे बीते हुए कल की,
क्यूँ बेरंग से बढ़ रहे?
किस रंग में बेरंग हो?

किस रंग में?

आज का दिन गुलाल का था,
न था लहू का, न था हिंसा का,
न था मदिरा का, न था गुमने का,
कहाँ से आए ये रंग ज़िंदगी में?
किस रंग में बेरंग हो तुम?

किस रंग में?
किस रंग में?
किस रंग में...


© के॰ हरीश सिंह 2013

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