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Tuesday, October 28, 2014

मैं और मेरा टूथ ब्रश !


I come back to my blog afte may be a million...or a billion years. But thanks to my health getting better, I am back on my laptop, on the stage, behind the camera and every where which was out of bound for me. That morning I was brushing my teeth (like every morning) and I realised that I get the best ideas when I am brushing (PS: Albert Einstein had once said that he gets the best ideas, when he is shaving!). So, I realized why don't I give credit to the tooth brush which deserves every word of this Hindi poem... 'Main aur mera tooth brush' मैं और मेरा टुथ ब्रश सुबह-सवेरे, जब आँख खुल ही रही होती है, जब दिमाग में विचार आ ही रहे होते हैं, इन सबसे पहले आजाता है, मेरा दोस्त, मेरा टूथ ब्रश। यह कुछ कहता नहीं है, कोई राय नहीं देता, सिर्फ सुनता है, शांति से, मेरा टूथ ब्रश। पूरे दिन के शुरुआत की योजना, सारी परेशानियों के हल की संभावनाएं, सुनता है, आराम से, मेरा टूथ ब्रश। सुबह की चाय से लेकर, रात के खाने तक, सबका स्वाद चखता है, चुप चाप, मेरा टूथ ब्रश। कपड़े धोने बाद में सीखा, जूते पर पॉलिश लगाना बाद में सीखा, पर सबसे पहले सीख लिया मैंने, ब्रश करना, अपने टूथ ब्रश से। जब दाँत आए ही थे, और बोलना सीखा भी न था, ना समझा था मैंने जीवन के रसों को, तब से शांति से सुनता आरहा है, हर सुबह, ये टूथ ब्रश, मेरा टूथ ब्रश। पहले सिर्फ एक शौक था, कौनसी कंपनी का, कौनसे रंग का, पर आज मेरी ज़रूरत बन गया है, मेरा प्यारा, शांत, मेरा टूथ ब्रश। पर अब मैं देखता हूँ आस-पास, और सोचता हूँ, की कौन है जो मुझे सुनते-समझते आ रहा हैं, शायद मेरे टूथ ब्रश की तरह। मेरे स्कूल के दोस्त? नहीं। मेरे कॉलेज के साथी? नहीं। मेरे ऑफिस के मित्र? नहीं। बस वो दो ही शख्स हैं, जो मुझे देखते-समझते आ रहे हैं, मेरे टूथ ब्रश से भी पहले से। और उससे ज़्यादा शांति से। मेरे माता-पिता। मेरे टूथ ब्रश को हर रोज़ का सलाम ज़रूर, पर मेरे माँ-बाप को ज़िंदगी भर का नमस्कार, ज़िंदगी भर का नमस्कार, ज़िंदगी भर का नमस्कार :)

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